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Panch Parmeshwar story in hindi पंच – परमेश्वर

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हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार प्रेमचंद का असली नाम धनपतराय था . इनका जन्म वाराणसी के पास लम्ही में हुआ था

panch parmeshwar story in hindi

पंच – परमेश्वर

जुम्मन शेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, तो जुम्मन पर अपना घर छोड़ देते थे। उनमें न खाना-पाना का व्यवहार था, न धर्म का नाता; केवल विचार मिलते थे। मित्रता का मूलमंत्र भी यही है।

इस मित्रता का जन्म उसी समय हुआ, जब दोनों मित्र बालक ही थे, और जुम्मन के पूज्य पिता, जुमराती, उन्हें शिक्षा प्रदान करते थे। अलगू ने गुरू जी की बहुत सेवा की थी, खूब प्याले धोये। उनका हुक्का एक क्षण के लिए भी विश्राम न लेने पाता था, क्योंकि प्रत्येक चिलम अलगू को आध घंटे तक किताबों से अलग कर देती थी। अलगू के पिता पुराने विचारों के मनुष्य थे। उन्हें शिक्षा की अपेक्षा गुरु की सेवा-शुश्रूषा पर अधिक विश्वास था। वह कहते थे कि विद्या पढ़ने ने नहीं आती; जो कुछ होता है, गुरु के आशीर्वाद से। बस, गुरु जी की कृपा-दृष्टि चाहिए। अतएव यदि अलगू पर जुमराती शेख के आशीर्वाद अथवा सत्संग का कुछ फल न हुआ, तो यह मानकर संतोष कर लेना कि विद्योपार्जन में मैंने यथाशक्ति कोई बात उठा नहीं रखी, विद्या उसके भाग्य ही में न थी, तो कैसे आती?

मगर जुमराती शेख स्वयं आशीर्वाद के कायल न थे। उन्हें अपने सोटे पर अधिक भरोसा था, और उसी सोटे के प्रताप से आज-पास के गॉँवों में जुम्मन की पूजा होती थी। उनके लिखे हुए रेहननामे या बैनामे पर कचहरी का मुहर्रिर भी कदम न उठा सकता था। हल्के का डाकिया, कांस्टेबिल और तहसील का चपरासी–सब उनकी कृपा की आकांक्षा रखते थे। अतएव अलगू का मान उनके धन के कारण था, तो जुम्मन शेख अपनी अनमोल विद्या से ही सबके आदरपात्र बने थे।

जुम्मन शेख की एक बूढ़ी खाला (मौसी) थी। उसके पास कुछ थोड़ी-सी मिलकियत थी; परन्तु उसके निकट संबंधियों में कोई न था। जुम्मन ने लम्बे-चौड़े वादे करके वह मिलकियत अपने नाम लिखवा ली थी। जब तक दानपत्र की रजिस्ट्री न हुई थी, तब तक खालाजान का खूब आदर-सत्कार किया गया; उन्हें खूब स्वादिष्ट पदार्थ खिलाये गये। हलवे-पुलाव की वर्षा- सी की गयी; पर रजिस्ट्री की मोहर ने इन खातिरदारियों पर भी मानों मुहर लगा दी। जुम्मन की पत्नी करीमन रोटियों के साथ कड़वी बातों के कुछ तेज, तीखे सालन भी देने लगी। जुम्मन शेख भी निठुर हो गये। अब बेचारी खालाजान को प्राय: नित्य ही ऐसी बातें सुननी पड़ती थी।

बुढ़िया न जाने कब तक जियेगी। दो-तीन बीघे ऊसर क्या दे दिया, मानों मोल ले लिया है ! बघारी दाल के बिना रोटियॉँ नहीं उतरतीं ! जितना रुपया इसके पेट में झोंक चुके, उतने से तो अब तक गॉँव मोल ले लेते।

कुछ दिन खालाजान ने सुना और सहा; पर जब न सहा गया तब जुम्मन से शिकायत की। तुम्मन ने स्थानीय कर्मचारीगृहस्वांमीके प्रबंध देना उचित न समझा। कुछ दिन तक दिन तक और यों ही रो-धोकर काम चलता रहा। अन्त में एक दिन खाला ने जुम्मन से कहाबेटा ! तुम्हारे साथ मेरा निर्वाह न होगा। तुम मुझे रुपये दे दिया करो, मैं अपना पका-खा लूँगी।

जुम्मन ने घृष्टता के साथ उत्तर दियारुपये क्या यहाँ फलते हैं?

खाला ने नम्रता से कहामुझे कुछ रूखा-सूखा चाहिए भी कि नहीं?

जुम्मन ने गम्भीर स्वर से जवाब़ दियातो कोई यह थोड़े ही समझा था कि तु मौत से लड़कर आयी हो?

खाला बिगड़ गयीं, उन्होंने पंचायत करने की धमकी दी। जुम्मन हँसे, जिस तरह कोई शिकारी हिरन को जाली की तरफ जाते देख कर मन ही मन हँसता है। वह बोलेहॉँ, जरूर पंचायत करो। फैसला हो जाय। मुझे भी यह रात-दिन की खटखट पसंद नहीं।

पंचायत में किसकी जीत होगी, इस विषय में जुम्मन को कुछ भी संदेह न थ। आस-पास के गॉँवों में ऐसा कौन था, उसके अनुग्रहों का ऋणी न हो; ऐसा कौन था, जो उसको शत्रु बनाने का साहस कर सके? किसमें इतना बल था, जो उसका सामना कर सके? आसमान के फरिश्ते तो पंचायत करने आवेंगे ही नहीं।

 

इसके बाद कई दिन तक बूढ़ी खाला हाथ में एक लकड़ी लिये आस-पास के गॉँवों में दौड़ती रहीं। कमर झुक कर कमान हो गयी थी। एक-एक पग चलना दूभर था; मगर बात आ पड़ी थी। उसका निर्णय करना जरूरी था।

बिरला ही कोई भला आदमी होगा, जिसके समाने बुढ़िया ने दु:ख के ऑंसू न बहाये हों। किसी ने तो यों ही ऊपरी मन से हूँ-हॉँ करके टाल दिया, और किसी ने इस अन्याय पर जमाने को गालियाँ दीं। कहाकब्र में पॉँव जटके हुए हैं, आज मरे, कल दूसरा दिन, पर हवस नहीं मानती। अब तुम्हें क्या चाहिए? रोटी खाओ और अल्लाह का नाम लो। तुम्हें अब खेती-बारी से क्या काम है? कुछ ऐसे सज्जन भी थे, जिन्हें हास्य-रस के रसास्वादन का अच्छा अवसर मिला। झुकी हुई कमर, पोपला मुँह, सन के-से बाल इतनी सामग्री एकत्र हों, तब हँसी क्यों न आवे? ऐसे न्यायप्रिय, दयालु, दीन-वत्सल पुरुष बहुत कम थे, जिन्होंने इस अबला के दुखड़े को गौर से सुना हो और उसको सांत्वना दी हो। चारों ओर से घूम-घाम कर बेचारी अलगू चौधरी के पास आयी। लाठी पटक दी और दम लेकर बोलीबेटा, तुम भी दम भर के लिये मेरी पंचायत में चले आना।

अलगूमुझे बुला कर क्या करोगी? कई गॉँव के आदमी तो आवेंगे ही।

खालाअपनी विपद तो सबके आगे रो आयी। अब आनरे न आने का अख्तियार उनको है।

अलगूयों आने को आ जाऊँगा; मगर पंचायत में मुँह न खोलूँगा।

खालाक्यों बेटा?

अलगूअब इसका कया जवाब दूँ? अपनी खुशी। जुम्मन मेरा पुराना मित्र है। उससे बिगाड़ नहीं कर सकता।

खालाबेटा, क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात न कहोगे?

हमारे सोये हुए धर्म-ज्ञान की सारी सम्पत्ति लुट जाय, तो उसे खबर नहीं होता, परन्तु ललकार सुनकर वह सचेत हो जाता है। फिर उसे कोई जीत नहीं सकता। अलगू इस सवाल का काई उत्तर न दे सका, पर उसके

हृदय में ये शब्द गूँज रहे थे-

क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात न कहोगे?

संध्या समय एक पेड़ के नीचे पंचायत बैठी। शेख जुम्मन ने पहले से ही फर्श बिछा रखा था। उन्होंने पान, इलायची, हुक्के-तम्बाकू आदि का प्रबन्ध भी किया था। हॉँ, वह स्वय अलबत्ता अलगू चौधरी के साथ जरा दूर पर बैठेजब पंचायत में कोई आ जाता था, तब दवे हुए सलाम से उसका स्वागत करते थे। जब सूर्य अस्त हो गया और चिड़ियों की कलरवयुक्त पंचायत पेड़ों पर बैठी, तब यहॉँ भी पंचायत शुरू हुई। फर्श की एक-एक अंगुल जमीन भर गयी; पर अधिकांश दर्शक ही थे। निमंत्रित महाशयों में से केवल वे ही लोग पधारे थे, जिन्हें जुम्मन से अपनी कुछ कसर निकालनी थी। एक कोने में आग सुलग रही थी। नाई ताबड़तोड़ चिलम भर रहा था। यह निर्णय करना असम्भव था कि सुलगते हुए उपलों से अधिक धुऑं निकलता था या चिलम के दमों से। लड़के इधर-उधर दौड़ रहे थे। कोई आपस में गाली-गलौज करते और कोई रोते थे। चारों तरफ कोलाहल मच रहा था। गॉँव के कुत्ते इस जमाव को भोज समझकर झुंड के झुंड जमा हो गए थे।

पंच लोग बैठ गये, तो बूढ़ी खाला ने उनसे विनती की–

पंचों, आज तीन साल हुए, मैंने अपनी सारी जायदाद अपने भानजे जुम्मन के नाम लिख दी थी। इसे आप लोग जानते ही होंगे। जुम्मन ने मुझे ता-हयात रोटी-कपड़ा देना कबूल किया। साल-भर तो मैंने इसके साथ रो-धोकर काटा। पर अब रात-दिन का रोना नहीं सहा जाता। मुझे न पेट की रोटी मिलती है न तन का कपड़ा। बेकस बेवा हूँ। कचहरी दरबार नहीं कर सकती। तुम्हारे सिवा और किसको अपना दु:ख सुनाऊँ? तुम लोग जो राह निकाल दो, उसी राह पर चलूँ। अगर मुझमें कोई ऐब देखो, तो मेरे मुँह पर थप्पड़ मारी। जुम्मन में बुराई देखो, तो उसे समझाओं, क्यों एक बेकस की आह लेता है ! मैं पंचों का हुक्म सिर-माथे पर चढ़ाऊँगी।

रामधन मिश्र, जिनके कई असामियों को जुम्मन ने अपने गांव में बसा लिया था, बोलेजुम्मन मियां किसे पंच बदते हो? अभी से इसका निपटारा कर लो। फिर जो कुछ पंच कहेंगे, वही मानना पड़ेगा।

जुम्मन को इस समय सदस्यों में विशेषकर वे ही लोग दीख पड़े, जिनसे किसी न किसी कारण उनका वैमनस्य था। जुम्मन बोलेपंचों का हुक्म अल्लाह का हुक्म है। खालाजान जिसे चाहें, उसे बदें। मुझे कोई उज्र नहीं।

खाला ने चिल्लाकर कहा–अरे अल्लाह के बन्दे ! पंचों का नाम क्यों नहीं बता देता? कुछ मुझे भी तो मालूम हो।

जुम्मन ने क्रोध से कहा–इस वक्त मेरा मुँह न खुलवाओ। तुम्हारी बन पड़ी है, जिसे चाहो, पंच बदो।

खालाजान जुम्मन के आक्षेप को समझ गयीं, वह बोली–बेटा, खुदा से डरो। पंच न किसी के दोस्त होते हैं, ने किसी के दुश्मन। कैसी बात कहते हो! और तुम्हारा किसी पर विश्वास न हो, तो जाने दो; अलगू चौधरी को तो मानते हो, लो, मैं उन्हीं को सरपंच बदती हूँ।

जुम्मन शेख आनंद से फूल उठे, परन्तु भावों को छिपा कर बोले–अलगू ही सही, मेरे लिए जैसे रामधन वैसे अलगू।

अलगू इस झमेले में फँसना नहीं चाहते थे। वे कन्नी काटने लगे। बोले–खाला, तुम जानती हो कि मेरी जुम्मन से गाढ़ी दोस्ती है।

खाला ने गम्भीर स्वर में कहा–बेटा, दोस्ती के लिए कोई अपना ईमान नहीं बेचता। पंच के दिल में खुदा बसता है। पंचों के मुँह से जो बात निकलती है, वह खुदा की तरफ से निकलती है।

अलगू चौधरी सरपंच हुएं रामधन मिश्र और जुम्मन के दूसरे विरोधियों ने बुढ़िया को मन में बहुत कोसा।

अलगू चौधरी बोले–शेख जुम्मन ! हम और तुम पुराने दोस्त हैं ! जब काम पड़ा, तुमने हमारी मदद की है और हम भी जो कुछ बन पड़ा, तुम्हारी सेवा करते रहे हैं; मगर इस समय तुम और बुढ़ी खाला, दोनों हमारी निगाह में बराबर हो। तुमको पंचों से जो कुछ अर्ज करनी हो, करो।

जुम्मन को पूरा विश्वास था कि अब बाजी मेरी है। अलग यह सब दिखावे की बातें कर रहा है। अतएव शांत-चित्त हो कर बोले–पंचों, तीन साल हुए खालाजान ने अपनी जायदाद मेरे नाम हिब्बा कर दी थी। मैंने उन्हें ता-हयात खाना-कप्ड़ा देना कबूल किया था। खुदा गवाह है, आज तक मैंने खालाजान को कोई तकलीफ नहीं दी। मैं उन्हें अपनी मॉँ के समान समझता हूँ। उनकी खिदमत करना मेरा फर्ज है; मगर औरतों में जरा अनबन रहती है, उसमें मेरा क्या बस है? खालाजान मुझसे माहवार खर्च अलग मॉँगती है। जायदाद जितनी है; वह पंचों से छिपी नहीं। उससे इतना मुनाफा नहीं होता है कि माहवार खर्च दे सकूँ। इसके अलावा हिब्बानामे में माहवार खर्च का कोई जिक्र नही। नहीं तो मैं भूलकर भी इस झमेले मे न पड़ता। बस, मुझे यही कहना है। आइंदा पंचों का अख्तियार है, जो फैसला चाहें, करे।

अलगू चौधरी को हमेशा कचहरी से काम पड़ता था। अतएव वह पूरा कानूनी आदमी था। उसने जुम्मन से जिरह शुरू की। एक-एक प्रश्न जुम्मन के हृदय पर हथौड़ी की चोट की तरह पड़ता था। रामधन मिश्र इस प्रश्नों पर मुग्ध हुए जाते थे। जुम्मन चकित थे कि अलगू को क्या हो गया। अभी यह अलगू मेरे साथ बैठी हुआ कैसी-कैसी बातें कर रहा था ! इतनी ही देर में ऐसी कायापलट हो गयी कि मेरी जड़ खोदने पर तुला हुआ है। न मालूम कब की कसर यह निकाल रहा है? क्या इतने दिनों की दोस्ती कुछ भी काम न आवेगी?

जुम्मन शेख तो इसी संकल्प-विकल्प में पड़े हुए थे कि इतने में अलगू ने फैसला सुनाया–

जुम्मन शेख तो इसी संकल्प-विकल्प में पड़े हुए थे कि इतने में अलगू ने फैसला सुनाया–

जुम्मन शेख ! पंचों ने इस मामले पर विचार किया। उन्हें यह नीति संगत मालूम होता है कि खालाजान को माहवार खर्च दिया जाय। हमारा विचार है कि खाला की जायदाद से इतना मुनाफा अवश्य होता है कि माहवार खर्च दिया जा सके। बस, यही हमारा फैसला है। अगर जुम्मन को खर्च देना मंजूर न हो, तो हिब्वानामा रद्द समझा जाय।

यह फैसला सुनते ही जुम्मन सन्नाटे में आ गये। जो अपना मित्र हो, वह शत्रु का व्यवहार करे और गले पर छुरी फेरे, इसे समय के हेर-फेर के सिवा और क्या कहें? जिस पर पूरा भरोसा था, उसने समय पड़ने पर धोखा दिया। ऐसे ही अवसरों पर झूठे-सच्चे मित्रों की परीक्षा की जाती है। यही कलियुग की दोस्ती है। अगर लोग ऐसे कपटी-धोखेबाज न होते, तो देश में आपत्तियों का प्रकोप क्यों होता? यह हैजा-प्लेग आदि व्याधियॉँ दुष्कर्मों के ही दंड हैं।

मगर रामधन मिश्र और अन्य पंच अलगू चौधरी की इस नीति-परायणता को प्रशंसा जी खोलकर कर रहे थे। वे कहते थे–इसका नाम पंचायत है ! दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। दोस्ती, दोस्ती की जगह है, किन्तु धर्म का पालन करना मुख्य है। ऐसे ही सत्यवादियों के बल पर पृथ्वी ठहरी है, नहीं तो वह कब की रसातल को चली जाती।

इस फैसले ने अलगू और जुम्मन की दोस्ती की जड़ हिला दी। अब वे साथ-साथ बातें करते नहीं दिखायी देते। इतना पुराना मित्रता-रूपी वृक्ष

सत्य का एक झोंका भी न सह सका। सचमुच वह बालू की ही जमीन पर खड़ा था।

उनमें अब शिष्टाचार का अधिक व्यवहार होने लगा। एक दूसरे की आवभगत ज्यादा करने लगा। वे मिलते-जुलते थे, मगर उसी तरह जैसे तलवार से ढाल मिलती है।

जुम्मन के चित्त में मित्र की कुटिलता आठों पहर खटका करती थी। उसे हर घड़ी यही चिंता रहती थी कि किसी तरह बदला लेने का अवसर मिले।

अच्छे कामों की सिद्धि में बड़ी दरे लगती है; पर बुरे कामों की सिद्धि में यह बात नहीं होती; जुम्मन को भी बदला लेने का अवसर जल्द ही मिल गया। पिछले साल अलगू चौधरी बटेसर से बैलों की एक बहुत अच्छी गोई मोल लाये थे। बैल पछाहीं जाति के सुंदर, बडे-बड़े सीगोंवाले थे। महीनों तक आस-पास के गॉँव के लोग दर्शन करते रहे। दैवयोग से जुम्मन की पंचायत के एक महीने के बाद इस जोड़ी का एक बैल मर गया। जुम्मन ने दोस्तों से कहा–यह दग़ाबाज़ी की सजा है। इन्सान सब्र भले ही कर जाय, पर खुदा नेक-बद सब देखता है। अलगू को संदेह हुआ कि जुम्मन ने बैल को विष दिला दिया है। चौधराइन ने भी जुम्मन पर ही इस दुर्घटना का दोषारोपण किया उसने कहा–जुम्मन ने कुछ कर-करा दिया है। चौधराइन और करीमन में इस विषय पर एक दिन खुब ही वाद-विवाद हुआ दोनों देवियों ने शब्द-बाहुल्य की नदी बहा दी। व्यंगय, वक्तोक्ति अन्योक्ति और उपमा आदि अलंकारों में बातें हुईं। जुम्मन ने किसी तरह शांति स्थापित की। उन्होंने अपनी पत्नी को डॉँट-डपट कर समझा दिया। वह उसे उस रणभूमि से हटा भी ले गये। उधर अलगू चौधरी ने समझाने-बुझाने का काम अपने तर्क-पूर्ण सोंटे से लिया।

अब अकेला बैल किस काम का? उसका जोड़ बहुत ढूँढ़ा गया, पर न मिला। निदान यह सलाह ठहरी कि इसे बेच डालना चाहिए। गॉँव में एक समझू साहु थे, वह इक्का-गाड़ी हॉँकते थे। गॉँव के गुड़-घी लाद कर मंडी ले जाते, मंडी से तेल, नमक भर लाते, और गॉँव में बेचते। इस बैल पर उनका मन लहराया। उन्होंने सोचा, यह बैल हाथ लगे तो दिन-भर में बेखटके तीन खेप हों। आज-कल तो एक ही खेप में लाले पड़े रहते हैं। बैल देखा, गाड़ी में दोड़ाया, बाल-भौरी की पहचान करायी, मोल-तोल किया और उसे ला कर द्वार पर बॉँध ही दिया। एक महीने में दाम चुकाने का वादा ठहरा। चौधरी को भी गरज थी ही, घाटे की परवाह न की।

समझू साहु ने नया बैल पाया, तो लगे उसे रगेदने। वह दिन में तीन-तीन, चार-चार खेपें करने लगे। न चारे की फिक्र थी, न पानी की, बस खेपों से काम था। मंडी ले गये, वहॉँ कुछ सूखा भूसा सामने डाल दिया। बेचारा जानवर अभी दम भी न लेने पाया था कि फिर जोत दिया। अलगू चौधरी के घर था तो चैन की बंशी बचती थी। बैलराम छठे-छमाहे कभी बहली में जोते जाते थे। खूब उछलते-कूदते और कोसों तक दौड़ते चले जाते थे। वहॉँ बैलराम का रातिब था, साफ पानी, दली हुई अरहर की दाल और भूसे के साथ खली, और यही नहीं, कभी-कभी घी का स्वाद भी चखने को मिल जाता था। शाम-सबेरे एक आदमी खरहरे करता, पोंछता और सहलाता था। कहॉँ वह सुख-चैन, कहॉँ यह आठों पहर कही खपत। महीने-भर ही में वह पिस-सा गया। इक्के का यह जुआ देखते ही उसका लहू सूख जाता था। एक-एक पग चलना दूभर था। हडिडयॉँ निकल आयी थी; पर था वह पानीदार, मार की बरदाश्त न थी।

एक दिन चौथी खेप में साहु जी ने दूना बोझ लादा। दिन-भरका थका जानवर, पैर न उठते थे। पर साहु जी कोड़े फटकारने लगे। बस, फिर क्या था, बैल कलेजा तोड़ का चला। कुछ दूर दौड़ा और चाहा कि जरा दम ले लूँ; पर साहु जी को जल्द पहुँचने की फिक्र थी; अतएव उन्होंने कई कोड़े बड़ी निर्दयता से फटकारे। बैल ने एक बार फिर जोर लगाया; पर अबकी बार शक्ति ने जवाब दे दिया। वह धरती पर गिर पड़ा, और ऐसा गिरा कि फिर न उठा। साहु जी ने बहुत पीटा, टॉँग पकड़कर खीचा, नथनों में लकड़ी ठूँस दी; पर कहीं मृतक भी उठ सकता है? तब साहु जी को कुछ शक हुआ। उन्होंने बैल को गौर से देखा, खोलकर अलग किया; और सोचने लगे कि गाड़ी कैसे घर पहुँचे। बहुत चीखे-चिल्लाये; पर देहात का रास्ता बच्चों की ऑंख की तरह सॉझ होते ही बंद हो जाता है। कोई नजर न आया। आस-पास कोई गॉँव भी न था। मारे क्रोध के उन्होंने मरे हुए बैल पर और दुर्रे लगाये और कोसने लगे–अभागे। तुझे मरना ही था, तो घर पहुँचकर मरता ! ससुरा बीच रास्ते ही में मर रहा। अब गड़ी कौन खीचे? इस तरह साहु जी खूब जले-भुने। कई बोरे गुड़ और कई पीपे घी उन्होंने बेचे थे, दो-ढाई सौ रुपये कमर में बंधे थे। इसके सिवा गाड़ी पर कई बोरे नमक थे; अतएव छोड़ कर जा भी न सकते थे। लाचार वेचारे गाड़ी पर ही लेटे गये। वहीं रतजगा करने की ठान ली। चिलम पी, गाया। फिर हुक्का पिया। इस तरह साह जी आधी रात तक नींद को बहलाते रहें। अपनी जान में तो वह जागते ही रहे; पर पौ फटते ही जो नींद टूटी और कमर पर हाथ रखा, तो थैली गायब ! घबरा कर इधर-उधर देखा तो कई कनस्तर तेल भी नदारत ! अफसोस में बेचारे ने सिर पीट लिया और पछाड़ खाने लगा। प्रात: काल रोते-बिलखते घर पहँचे। सहुआइन ने जब यह बूरी सुनावनी सुनी, तब पहले तो रोयी, फिर अलगू चौधरी को गालियॉँ देने लगी–निगोड़े ने ऐसा कुलच्छनी बैल दिया कि जन्म-भर की कमाई लुट गयी।

इस घटना को हुए कई महीने बीत गए। अलगू जब अपने बैल के दाम मॉँगते तब साहु और सहुआइन, दोनों ही झल्लाये हुए कुत्ते की तरह चढ़ बैठते और अंड-बंड बकने लगतेवाह ! यहॉँ तो सारे जन्म की कमाई लुट गई, सत्यानाश हो गया, इन्हें दामों की पड़ी है। मुर्दा बैल दिया था, उस पर दाम मॉँगने चले हैं ! ऑंखों में धूल झोंक दी, सत्यानाशी बैल गले बॉँध दिया, हमें निरा पोंगा ही समझ लिया है ! हम भी बनिये के बच्चे है, ऐसे बुद्धू कहीं और होंगे। पहले जाकर किसी गड़हे में मुँह धो आओ, तब दाम लेना। न जी मानता हो, तो हमारा बैल खोल ले जाओ। महीना भर के बदले दो महीना जोत लो। और क्या लोगे?

चौधरी के अशुभचिंतकों की कमी न थी। ऐसे अवसरें पर वे भी एकत्र हो जाते और साहु जी के बराने की पुष्टि करते। परन्तु डेढ़ सौ रुपये से इस तरह हाथ धो लेना आसान न था। एक बार वह भी गरम पड़े। साहु जी बिगड़ कर लाठी ढूँढ़ने घर चले गए। अब सहुआइन ने मैदान लिया। प्रश्नोत्तर होते-होते हाथापाई की नौबत आ पहुँची। सहुआइन ने घर में घुस कर किवाड़ बन्द कर लिए। शोरगुल सुनकर गॉँव के भलेमानस घर से निकाला। वह परामर्श देने लगे कि इस तरह से काम न चलेगा। पंचायत कर लो। कुछ तय हो जाय, उसे स्वीकार कर लो। साहु जी राजी हो गए। अलगू ने भी हामी भर ली।

 

पंचायत की तैयारियॉँ होने लगीं। दोनों पक्षों ने अपने-अपने दल बनाने शुरू किए। इसके बाद तीसरे दिन उसी वृक्ष के नीचे पंचायत बैठी। वही संध्या का समय था। खेतों में कौए पंचायत कर रहे थे। विवादग्रस्त विषय था यह कि मटर की फलियों पर उनका कोई स्वत्व है या नही, और जब तक यह प्रश्न हल न हो जाय, तब तक वे रखवाले की पुकार पर अपनी अप्रसन्नता प्रकट करना आवश्यकत समझते थे। पेड़ की डालियों पर बैठी शुक-मंडली में वह प्रश्न छिड़ा हुआ था कि मनुष्यों को उन्हें वेसुरौवत कहने का क्या अधिकार है, जब उन्हें स्वयं अपने मित्रों से दगां करने में भी संकोच नहीं होता।

पंचायत बैठ गई, तो रामधन मिश्र ने कहा-अब देरी क्या है ? पंचों का चुनाव हो जाना चाहिए। बोलो चौधरी ; किस-किस को पंच बदते हो।

अलगू ने दीन भाव से कहा-समझू साहु ही चुन लें।

समझू खड़े हुए और कड़कर बोले-मेरी ओर से जुम्मन शेख।

जुम्मन का नाम सुनते ही अलगू चौधरी का कलेजा धक्-धक् करने लगा, मानों किसी ने अचानक थप्पड़ मारा दिया हो। रामधन अलगू के मित्र थे। वह बात को ताड़ गए। पूछा-क्यों चौधरी तुम्हें कोई उज्र तो नही।

चौधरी ने निराश हो कर कहा-नहीं, मुझे क्या उज्र होगा?

अपने उत्तरदायित्व का ज्ञान बहुधा हमारे संकुचित व्यवहारों का सुधारक होता है। जब हम राह भूल कर भटकने लगते हैं तब यही ज्ञान हमारा विश्वसनीय पथ-प्रदर्शक बन जाता है।

पत्र-संपादक अपनी शांति कुटी में बैठा हुआ कितनी धृष्टता और स्वतंत्रता के साथ अपनी प्रबल लेखनी से मंत्रिमंडल पर आक्रमण करता है: परंतु ऐसे अवसर आते हैं, जब वह स्वयं मंत्रिमंडल में सम्मिलित होता है। मंडल के भवन में पग धरते ही उसकी लेखनी कितनी मर्मज्ञ, कितनी विचारशील, कितनी न्याय-परायण हो जाती है। इसका कारण उत्तर-दायित्व का ज्ञान है। नवयुवक युवावस्था में कितना उद्दंड रहता है। माता-पिता उसकी ओर से कितने चितिति रहते है! वे उसे कुल-कलंक समझते हैंपरन्तु थौड़ी हीी समय में परिवार का बौझ सिर पर पड़ते ही वह अव्यवस्थित-चित्त उन्मत्त युवक कितना धैर्यशील, कैसा शांतचित्त हो जाता है, यह भी उत्तरदायित्व के ज्ञान का फल है।

जुम्मन शेख के मन में भी सरपंच का उच्च स्थान ग्रहण करते ही अपनी जिम्मेदारी का भाव पेदा हुआ। उसने सोचा, मैं इस वक्त न्याय और धर्म के सर्वोच्च आसन पर बैठा हूँ। मेरे मुँह से इस समय जो कुछ निकलेगा, वह देववाणी के सदृश है-और देववाणी में मेरे मनोविकारों का कदापि समावेश न होना चाहिए। मुझे सत्य से जौ भर भी टलना उचित नही!

पंचों ने दोनों पक्षों से सवाल-जवाब करने शुरू किए। बहुत देर तक दोनों दल अपने-अपने पक्ष का समर्थन करते रहे। इस विषय में तो सब सहमत थे कि समझू को बैल का मूल्य देना चाहिए। परन्तु वो महाशय इस कारण रियायत करना चाहते थे कि बैल के मर जाने से समझू को हानि हुई। उसके प्रतिकूल दो सभ्य मूल के अतिरिक्त समझू को दंड भी देना चाहते थे, जिससे फिर किसी को पशुओं के साथ ऐसी निर्दयता करने का साहस न हो। अन्त में जुम्मन ने फैसला सुनाया-

अलगू चौधरी और समझू साहु। पंचों ने तुम्हारे मामले पर अच्छी तरह विचार किया। समझू को उचित है कि बैल का पूरा दाम दें। जिस वक्त उन्होंने बैल लिया, उसे कोई बीमारी न थी। अगर उसी समय दाम दे दिए जाते, तो आज समझू उसे फेर लेने का आग्रह न करते। बैल की मृत्यु केवल इस कारण हुई कि उससे बड़ा कठिन परिश्रम लिया गया और उसके दाने-चारे का कोई प्रबंध न किया गया।

रामधन मिश्र बोले-समझू ने बैल को जान-बूझ कर मारा है, अतएव उससे दंड लेना चाहिए।

जुम्मन बोले-यह दूसरा सवाल है। हमको इससे कोई मतलब नहीं !

झगडू साहु ने कहा-समझू के साथं कुछ रियायत होनी चाहिए।

जुम्मन बोले-यह अलगू चौधरी की इच्छा पर निर्भर है। यह रियायत करें, तो उनकी भलमनसी।

अलगू चौधरी फूले न समाए। उठ खड़े हुए और जोर से बोल-पंच-परमेश्वर की जय!

इसके साथ ही चारों ओर से प्रतिध्वनि हुई-पंच परमेश्वर की जय! यह मनुष्य का काम नहीं, पंच में परमेश्वर वास करते हैं, यह उन्हीं की महिमा है। पंच के सामने खोटे को कौन खरा कह सकता है?

थोड़ी देर बाद जुम्मन अलगू के पास आए और उनके गले लिपट कर बोले-भैया, जब से तुमने मेरी पंचायत की तब से मैं तुम्हारा प्राण-घातक शत्रु बन गया था; पर आज मुझे ज्ञात हुआ कि पंच के पद पर बैठ कर न कोई किसी का दोस्त है, न दुश्मन। न्याय के सिवा उसे और कुछ नहीं सूझता। आज मुझे विश्वास हो गया कि पंच की जबान से खुदा बोलता है।

अलगू रोने लगे। इस पानी से दोनों के दिलों का मैल धुल गया। मित्रता की मुरझाई हुई लता फिर हरी हो गई।

समाप्त

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How can type in hindi ? hindi typing keyboard

हिन्दी में कैसे टाइप करे या कैसे लिखे . अब कंप्यूटर पर हिंदी में टाइप करना बहुत आसन हो गया हैं . इसके लिए बहुत सी  website  इन्टरनेट पर उपलब्ध हैं

जिसमे प्रमुख हैं

1 . https://translate.google.com/#hi/en/  इस लिंक को ओपन करने पर आपके computer पर दो box ओपन होंगे . जिसमे आप english में कोई भी शब्द लिखेंगे तो वो अपने आप हिंदी में बदल जाएगा जैसे आप लिखेंगे  Ram तो वो अपने आप राम में बदल जायेगा या जैसे लिखेंगे bharat तो वो अपने आप भारत में convert हो जाएगा .

2. http://utilities.webdunia.com/hindi/onlinetypingtools.html इस लिंक को आप ओपन करेंगे तो केवल एक ही box खुलेगा  जिसमे आप english में कुछ भी लिखेंगे वो अपने आप हिंदी में बदल जायेंगा . जैसे की आप ने लिखा visv यो वो अपने आप विश्व  में बदल जाएगा .

3 . https://www.branah.com/hindi इस लिंक को खोलने पर आपकी browser स्क्रीन पर एक हिंदी Key Board ओपन होगा उसमे आप हिंदी अक्षर टाइप करके उनको आप कॉपी कर सकते हैं और आप facebook या किसी अन्य साईट पर पोस्ट कर सकते हैं .

4 . http://www.quillpad.in/index.html#.VA8WPPmSzXp      इस साईट पर भी आप हिंदी में टाइपिंग कर सकते हैं .

5. http://hindikeyboard.indiapress.org/ इस लिंक को open करने पर आप की browser screen पर एक हिंदी की बोर्ड  दिखायी देगा  इसमें भी आप हिंदी की बोर्ड पर टाइप कर सकते हैं और उसे भी कॉपी पेस्ट कर सकते हो .

पर ये इन सब के लिए आप को internet use करने की आवश्यकता पड़ती हैं , और आप चाहते हैं की आप बिना किसी इन्टरनेट connection के हिंदी में टाइप कर पाए तो इसके लिए भी अब सुविधा उपलब्ध हैं सबसे पहले आप को google.com पर जाना होगा इसमें आप को google tools डाल के search कराना होगा उसके results में पहली जो लिंक आएगी वो होगी http://www.google.com/inputtools/try/ इस लिंक को आपको ओपन करना होगा  . इसे ओपन करने पर आपको एक आप्शन दिखयी देगा जिसमे लिखा होगा Download for Windows उस पर आप क्लीक करेंगे तो http://www.google.com/inputtools/windows/  ये लिंक ओपन होगी उसमे आप को languages Choose  करनी होगी फिर आप उसको डाउनलोड कर सकते हैं  बाद आप अपने PC या Laptop में इस इनस्टॉल कर सकते हैं और आप आसानी से हिंदी में टाइप कर सकते हैं बिना किसी इन्टरनेट connection के .

The Clever Jackal Story In Hindi चतुर गीदड़

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एक बड़ा जंगल था । जंगल में एक शेर रहता था । शेर के साथ एक बाघ ,कौवा , और गीदड़ भी रहते थे ।इन सभी में गहरी दोस्ती थी ।एक बार जब वो जंगल से जा रहे थे तो उन्ह्नो एक ऊंट को देखा । उन्ह्नो ऊंट को जंगल में पहली बार देखा था । ऊंट को देखकर शेर ने कहा अरे ये यह कोनसा विचित्र जानवर हैं तुम इसके पास जाकर पूछो की यह एक जंगली जानवर हैं या कोई मैदानी जानवर हैं ।इस पर कौवा ने तुरंत कहा की महाराज यह मैदानी जानवर हैं ये जंगली नहीं हैं । इसका मांस बहुत ही स्वादिष्ट होता हैं । इसको मारकर आप खा लीजिये । इस पर शेर ने कहा की मैं घर आये शत्रु को कभी नहीं मारता । अगर कोई डर न मानता हुआ कोई शत्रु अपने पास आ जाये तो उसे मारना नहीं चाहिए अगर उसको मारते हैं तो उसे वही पाप लगता हैं  जो एक पंडित को मारने पर लगता हैं । इसी कारण से मे इस को मारकर पाप का भागीदार नहीं बनना चाहता ,तुम जाकर उसे मेरे पास ले के आओ मैं उससे इस जंगल में आने के कारन पूछ लू । जी महाराज हम अभी उसको आपके पास लेके आते हैं य। यह कहकर वे वे तीनो ऊंट के पास चले गए और बड़े प्यार से जाकर ऊंट से बोले मित्र जंगल का राजा शेर आपसे दोस्ती करना चाहता हैं । यदि ऐसा हैं तो में कैसे मन कर सकता हूँ। यह कहकर ऊंट उनके साथ चल दिया । शेर ने ऊंट को अपने पास में बिठाया और कहा भाई इस जंगल में कैसे आये हो ? ऊंट ने शेर से कहा मित्र मैं अपने साथियो से बिछड़ गया हूँ  ।उनकी की तलाश में ही मैं इस जंगल मैं भटक रहा हूँ मुझे ऐसा लगता मेरी तो किस्मत ही कमजोर हैं । ऐसी  बात मत करो मित्र शेर ने कहा । ऊंट ने कहा की अब क्या करूं  , अब मैं अकेला इस जंगल में भटकता रहता हूँ । कोई साथी नहीं , कोई भी मित्र नहीं, इसे अकेले प्राणी का भी कोई जीवन होता हैं । ऊंट ने निराश पूर्वक ठंडी आह भरते हुए कहा । फिर सभी ने कहा इस जंगल में तुम्हारा कोई मित्र नहीं तो क्या हुआ हम सब आजसे तुम्हारे मित्र ही तो हो । हमारे पास जैसा भी रुखा सुखा हैं उसे खाकर ही अपना गुजरा करो । क्या बात हैं मेरे मित्रो आप लोगो ने तो इस टूटे हुए दिल को सहारा दिया हैं ।मुझे आपसे दोस्ती करके बहुत ही प्रसन्नता होगी अब मैं अपने गाँव जाकर क्या करूँगा , अब तो मेरे लिए ये जंगल ही अच्छा रहेगा ।उस दिन से ऊंट भी उनके साथ रहने लगा ।गाँव के बंधन को छोड़कर जंगल की खुली हवा का आनन्द लेने लगा । उस को लगा की वह किसी जेल से आजाद होकर आ गया हैं । सब मित्र उसे कितना सारा प्यार करते हैं । इतना प्यार तो मुझे जीवन में कभी भी नहीं मिला एक बार शेर का किसी जंगली हाथी के साथ युद्ध हो गया उसमे शेर बुरी तरह से घायल हो गया । शेर के घायल उन सब पर संकट के बादल छा गए क्योकि शेर के शिकार से ही वे सब अपना पेट भरते थे  । शेर गुफा के अन्दर पड़ा था । उसका पेट भरना भी जरुरी था  । ऐसे मैं उन्हें समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे या न करे । इसी बीच भूखा शेर भी इन सबकी और देख रहा था । गीदड़ ,कौवा,और बाघ शेर की हालत देखकर बहुत दुखी हुए ।और सोचने लगे कि शेर के बिना हम कुछ भी नहीं कर सकते और गहरी सोच में पड गए की हमारा सबसे प्यारा मित्र हैं और इसके लिए भोजन की व्यवस्था खा से करे ? इन सब में गीदड़ बहुत दिमाग धारी था । उसने अपने दिमाग पर जोर डालते हुए कहा की हम सब में ऊंट ही एक ऐसा जानवर हैं जो शेर का भोजन बन सकता हैं । पर इन सब के बीच शेर को इस बात के लिए राजी करना एक बहुत बड़ी बात थी । फिर गीदड़ ने कहा की मैं शेर से इस तरह इस बात को कहुन्गा की शेर आसानी से मान जायेगा । तुम सभी यही पर रहो मैं अभी शेर से इस विषय पर बात करके आता हूँ और गीदड़ शेर के पास चला गया उसने शेर से कहा की हे महाराज आपकी ये हालत हम सबसे अब और नहीं देखि  जाती हमने पुरे जंगल को छानमारा पर हमें आपके लिए कोई भी शिकार नहीं मिला । इसलिए महाराज आप ऊंट का शिकार कर लीजिये , अच्छा रहेगा कम से कम आपका पेट तो भर जाएगा । शेर ने क्रोधित होते हुए कहा की मुर्ख तुझे क्या ये पता नहीं हैं की वो हमारा महमान हैं हम महमान का शिकार नहीं कर सकते चाहे भूखे मर जाए ।  गीदड़ ने कहा की हे महाराज ऊंट तो एक परदेसी हैं उसका खून करने में कोई दोष नहीं हैं क्योकि वो आपकी प्रजा नहीं हैं और अगर वो आगे से ही वो अपने आपको आगे से ही आपके हवाले कर दे तो इस में आपके लिए कोई बुरी बात नहीं हैं । शेर ने कहा जैसा तुम उचित समझो वैसा ही करो ।  गीदड़ फिर ऊंट के पास गया और अपने मित्रो के ऊंट को ले गया और कहने लगा देखो मित्रो हमारा राजा घायल होने के कारण पड़ा हुआ हैं और भूखा भी इनको  सता रही हैं । हमारे शास्त्रों में ऐसा लिखा हुआ हैं की जिस मित्र के होते हुए उसका मित्र दुःख भोगे वह सीधा नरक में जाता हैं । अत: हम सबको अपने राजा के पास चलना चाहिए । गीदड़ के कहने पर सभी गीदड़  के साथ शेर के पास गए । गीदड़ ने सभी को सिखा दिया था इसलिए कोवा झट से बोला हम ने आपके लिए बहुत शिकार ढूंढा पर हमे नहीं मिला , इसलिए आप मुझे ही खाकर अपना पेट भर लीजिये । कौए की बात बीच में ही काटते हुए गीदड़ ने कहा की तुम्हे खाने से राजा का पेट थोड़ी भरेगा मैं अपने आपको राजा के हवाले करता हूँ। इस बीच बाघ बोला  मेरे रहते हुए आप सब को ऐसा करने की आवश्यकता नहीं हैं आखिर मालिक ने मेरा कई वर्षो तक मेरा पेट भरा हैं इनके अहसानों का बदला तो मैं कई जन्मो तक नहीं चूका सकता , इसलिए मैं राजा को अपना शरीर अर्पण करे अपने आपको भाग्यशाली मानता हूँ ।इन सबकी बात सुनकर ऊंट ने भी कहा की मैंने भी तो शेर का नमक खाया हैं इसलिए मेरा भी तो कोई फर्ज  बनता हैं । उसने कहा की मेरा शरीर तुम सब से भरी हैं । इसलिए मेरा भोजन करके मालिक का पेट भर जाएगा ।सब इसी बात की प्रतीक्षा कर रहे ऐसा कहने पर वे ऊंट पर झपटे और बाघ ने ऊंट के शरीर को चीर दिया । फिर शेर ने और उन्होंने आराम से ऊंट का मांस खाया और अपना पेट भरा ।चतुर गीदड़ ने आखिर अपनी बुद्धिमानी से सबका पेट भर ही दिया ।

the clever jackal story in hindi

Akbar Birbal Story Tantra Mantra

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एक बार कुछ दरबारियों ने महाराजा अकबर से कहा की आज कल बीरबल को ज्योतिष का बड़ा शोक लगा हुआ हैं। वह यह कहते हुए फिरता हैं की की मंत्रो से मैं कुछ भी कर सकता हूँ। तभी दुसरे दरबारी ने ने महाराजा के कान भरते हुए कहा की जी महाराज वह बहुत शेखी बघारता फिर रहा हैं। हम सब उससे परेशान हो गए हैं ।वह दरबार के काम में जरा भी रूचि नहीं लेता हैं ।राजा बोले अच्छा परखकर देखते हैं की बीरबल के मंत्रो में कोई दम हैं या नहीं । यह कहते हुए राजा ने एक दरबारी से कहा की तुम अंगूठी को छुपा लो आज इस अंगूठी के बारे में ही बीरबल से पूछते हैं । तभी बीरबल दरबार में आया उसने महाराजा को प्रणाम किया और अपनी जगह पर जा के बैठ गया । अकबर ने कहा अभी अभी मेरी अंगूठी कही गायब हो गई हैं। जरा तुम पता लगाओ । सुना हैं की तंत्र मन्त्र की शक्ति से तुम कुछ भी कर सकते हो बीरबल ने कनखियों से दरबारियों की और देखा और समझ गया की उसके खिलाफ महाराजा के कान डटकर भरे गए हैं । कुछ सोचकर उसने कागज पर आड़ी तिरछी रेखाए खिंची फिर बोला महाराजा आप इस पर हाथ रखे , अंगूठी जहा भी होगीं ,अपने पास आ जाएगी । राजा ने उस तन्त्र पर अपना  हाथ रखा तभी बीरबल ने अपने हाथ में चावल लेकर दरबारियों की और फंकने लगा ।जिसके पास अंगूठी थी , वह सोचने लगा की कही सचमुच अंगूठी निकलकर राजा के पास न पहंच जाये उसने कसकर जेब पर हाथ रख लिया  । बीरबल यह सब द्रश्य ध्यान पूर्वक देख रहा था । बीरबल ने राजा से कहा की महाराज आपकी अंगूठी तो मिल गयी हैं । लेकिन उस अंगूठी को इस दरबारी ने कसकर पकड़ रखी हैं । अकबर बीरबल की बात को तुरंत समझ गए और उस अंगूठी को पुरस्कार में बीरबल को दे दी । चुगली करने वाले सभी दरबरियी के सिर शर्म से झुक गए ।

इस लघु कहानी से हमें यह शिक्षा मिलाती हैं की हमें अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति के दोषों को न देखकर उसके गुणों का अनुशरण करना चाहिए  ।

akbar birbal story

मेरे अकेले से क्या होगा

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एक बार एक गांव में बड़ी  भयंकर  आग लग गई . सभी गांव के लोग उसको भुजाने में लग गए . सभी पानी ला रहे थे . वहा पर एक चिड़िया भी थी वह अपनी चोंच में पानी भर भर कर ला के उस आग में डाल रही थी वहा पर एक कौवा भी बैठा हुआ था उसने चिड़िया का परिहास उड़ाते हुए कहा अरे मुर्ख चिड़िया तू कितनी भी कोशिश करले तेरे पानी डालने से ये आग नहीं भुजेगी तू पागलो जैसा काम कर रही हैं इसलिए तू व्यर्थ में परिश्रम मत कर यहाँ इसका कोई भी महत्व नहीं हैं

उस काग की बात सुनकर उस प्यारी सी चिडया ने कहा यह मुझे पहले से ही पता हैं लेकिन भविष्य में जब भी इस आग का जिक्र होगा तब मेरी गिनिती आग भुझाने वालो में होगी और धूर्त तेरी गिनती आग का तमाशा देखने वालो में होगी. चिड़िया की बात सुनकर कौवा दुखी हुआ और उसे चिडया की भावना का पता चला  गया की चिड़िया ने कम से कम प्रयास तो किया मैंने तो ये प्रयास भी नहीं किया

इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती हैं की कई बार हम सोचते हैं की हमारे एक के करने से क्या होगा लेकिन दोस्तोंकिस भी बड़े काम की शुरुआत एक छोटे काम से होती हैं इसलिए हमें हमेसा positive सोच के ही कार्य करना चाहिए

आप को यह कहानी कैसी लगी हमें अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे . अगर आपके पास इस प्रकार की कोई भी hindi motivational stories या hindi inspirational stories हैं तो आप हमें भेज सकते उसे इस साईट पर प्रकाशित किया जायेगा  हमारा ईमेल पता हैं  bharatgurjar@hindidesh.com

इसके अतिरिक्त आप इस साईट को और अधिक् कसे रोचक बनाये या कैसे पाठको के लिए उपयोगी बनाये इस बारे में अपने विचारो से हमें अवगत करा सकते हैं हमें आपकी प्रतिक्रियाओ का इन्तेज़ार रहेगा

So think always positive

धन्यवाद

Teachers Day Speech Hindi And English

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teachers day speech

teachers day speech in hindi 2014

आदरणीय प्रिंसिपल , समस्त गुरुजन और मेरे भाई बहिनों ।  शिक्षक दिवस पर मैं दो शब्द आपके सामने कहना चाहता हूँ उसमे कोई गलती हो तो क्षमाँ करे । शिक्षक दिवस हर 5 सितम्बर को बड़े धूम धाम से मनाया जाता हैं । इस दिन डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस होता हैं ।  डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के पहले उपराष्ट्रपति तथा दुसरे राष्ट्रपति थे ।  डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी एक जाने मानें विद्वान , आदर्श शिक्षक  , राजनयिक  व् दार्शनिक थे । उनका अध्यापन पेशे से एक अच्छा जुडाव था  । वे एक महँ स्वतंत्रता सेनानी भी थे  । उनके  द्वारा बताये गए रास्तो पर एक  शिक्षक  को चलाना चाहिए ।  शिक्षक का समाज निर्माण  में एक बड़ा योगदान होता हैं  । इसलिए कहा भी जाता हैं की एक आदर्श   शिक्षक ही एक आदर्श समाज का निर्माण कर सकता हैं  । इस दिन भारत के माननीय राष्ट्रपति  द्वार शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले शिक्षको को सम्मानित किया जाता हैं । सम्पूरण भारत में इस दिन अध्यापको को सम्मानित किया जाता हैं  । इस दिन शिक्षक अपने छात्रों को आशीर्वाद भी देते हैं । 

Teachers day  Quotes

Teacher mean – T– Talent , E–Education , A–  Attitude , C– Character H– Harmony  E — Efficient  Relation

“‘ A good teacher like a candle – It consumes itself to light the way for others . ‘”

The way you teach…..

The knowledge you share ……

The care you take ……

The love you shower ….

makes you world’s best Teacher …..

T – Tender E – Empathetic A- Admirable C- Caring   H – Honest  E – Encouraging R – Respectable

Guru Govind Dou khade Kaake Lagu Pau ,

Balhaari Guru Aapne Govind Diyo Batay .

Guru Vandana , Guru Mantra

Gurur Brahma Gurur Vishnuh ,

Gurur Devo Maheshvarah ,

Gurur Saakshaat parabrahma ,

tasmai Shree Gurave Namah .

गुरू मंत्र

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः ।

गुरुरेव परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ।।

Sita Ram charit ati pawan lyrics

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Sita Ram charit ati paavan,

Madhur saras aru ati man bhaavan

Puni puni kitnehu sune sunaaye,

Hiya  ki pyaas bujhat na bujhaaye .

Its mean

the story of Sita andRam is so pure,so sweet, so beautiful, and so appealing

over and over, however often you hear it or recite it

your heart’s craving for it just doesn’t get quenched .

Sita Ram charit ati pawan lyrics in hindi

सीता राम चरित अति पावन

मधुर सरस अरु अति मन भावन

पुनि पुनि कितनेहू सुने सुनाये

हिय की प्यास भुजत न भुजाये

this is taken from – Ramayan 1987  Ramanand Sagar

You can also Read Ramanand Sagar  Luv Kush ‘ s famous song  Hum katha sunate ram sakal gundham ki  Lyrics

Here

Eid Mubarak

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Eid Mubarak SMS wishes for your friends and Families read here

Can I Stay

Here

In

Ur

InbOx

&

Wait Till The End Of Ramzan

So

That

I

Can B

The 1st Who

Wish

 

 

A

Very sweet

&

Happy Eid Mubarik

 

—————————-

 

Hope Love & Laughter,

warmth & wishes

joy and a Bouquet of Eid Wishes,

Especially for you!!!

jublications become a past of your eid and your life….!

EID MUBARAK

 

—————————–

 

May God send his Love like Sunshine

in his warm and gentle ways

to fill every corner of your Heart

and filled your Life with a lot of

Happiness like this EID DAY.

Wishing you EID MUBARAK.

 

——————————–

 

Lonesome without u,

Each n every moments.

When i am alone

I close my eyes n think of u

N thoughts of ur love warms

Me inside n makes me smile.

miss you a lot. eid mubarak.

 

——————————-

 

24 SmileS..

 

 

🙂

:-):-)

:-):-):-)

:-):-):-):-)

🙂 🙂 🙂 🙂

:-):-):-):-)

:-):-):-)

:-):-)

🙂

 

For You,

 

One For Each Hour.!

So ThaT You Keep SMiLiNG 24 HOURS At EiD DaY..

 

——————————–

 

Sending u warm wishes on “EID-UL-Fitr”

and wishing that,

it brings your way ever joys and happiness.

Remember me in ur prayers.

 

———————————-

 

After congregational eid prayer,

Sentiment reciprocated with deep sense of

Gratitude and manifestation.

 

Very very happy eid to you and your family

 

———————————

 

Before the Golden Sun Rise,

let me decorate each of the Rays

with Wishes of Success,

prosperous and Happiness

4 u and 4 ur Family.

 

Happy Eid Mubarak.

 

———————————

 

May you be guided by

your faith in Allah

&

shine in his divine blessings!

Eid Mubarak

 

——————

 

Of all the days to celebrate

this out shines the rest,

 

 

Here is hoping that

this EID is happiest and best

 

———————

 

Its more than just an Eid wish,

more than a message too.

 

For it comes with warm and loving thoughts

because it’s meant for you.

 

———————–

 

May the choicest

blessing of Allah

fill your life with

joy and prosperity.

EID MUBARAK

——————–

 

Beware of other duplicae “EID wishers”

I’m the only authorized iso 2011

certified dealer in EID WISHES

I wish u an original sweet EID Mubarak

 

———————–

 

When my arms cant

reach people close to my heart.

I always hug them with my prayers.

May allahs peace be with you.

A very happy eid mubarak 2 U.

 

————————–

 

May the auspicious occasion of Eid ,

bless you with peace

and

bring joy to your heart and home.

 

EID Mubarak

 

—————————–

 

Network busy number busy

No signal massage not sent‚¦.

Thats what well see on 1st day of Eid

So “Happy Eid Day‚ before the rush start.

 

—————————-

 

I wish a wish for u.

The wish i wish for few.

The wish i wish for u is that

your all wishes come true

so keep on wishing

as my all wishes are with you.

Eid Mubarak

 

——————————

 

The bunch of

*FLOWERS*

is being specially

delivered to you

&

Your family.

Just to say….

 

“EID MUBARAK”

 

————————

 

I wish you ALL a very happy and peaceful Eid.

May Allah accept your good deeds,

forgive your transgressions and ease

the suffering of all peoples around the globe.

Eid Mubarak

 

———————-

 

May the day delight

and the moments measure all the special joys

for all of you to treasure.

May the year ahead

be fruitful too,

for your home and family

and specially for you.

 

EID MUBARAK

 

————————-

 

You are awarded a bouqet of good deeds,

a vase of blessing,

a parachut of glad itdings

4 completing da holy ramadan.

 

EID MUBARAK

 

————————-

 

U fasted,u prayed,

U been good 4 a whole 30 days.

So ur merciful ALLAH gave u a sign,

Out came the moon 2 say come celebrate..

Happy Eid mubarak

 

————————–

 

My Blessing, Congratulations and Good wishes.

I wish you the best of everything

for not only in EID-UL-Fitr but also

all the years ahead.*EID MUBARAK*

 

————————–

 

All that is in the heavens

and the earth

glorifieth Allah; and

He is the Mighty,

the Wise.

The Holy Quran [ 57:1]

 

Eid Mubarak to You.

 

————————–

 

Some words can be left unsaid,

Some feeling can be left unexpressed,

But person like u can never be forgotten on this day

 

EID MUBARAK

 

—————————-

 

Special dua 4 special person:

May

Allah almighty bless u with

Sehat,

Rahat,

Nemat,

Izzat,

Barkat,

Dault,

Salamti,

Hayati,

Kamyabi &

unlimited khushiyan 🙂

 

EID MUBARAK

 

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The moon has been sighted

The samoosas are ready

Here comes EID so just go steady

Lots of dua”s is all i request

and just wanted to wish you all the BEST!!!

“Eid Mubarak”

 

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after 24 hours everyone

will wish u but

I M THE FIRST 2 WISH U EID MUBARAK

 

 

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Today i pray that:-

Happiness be at ur door

May it knock early

Stay late & leave the gift of Allah’s

Peace,love,joy & good health behind

 

shaban mubarak,eid mubarak,

ramadan mubarak,

 

May you remain happy all the time

Irrespective of any occasion

 

 

 

how can i get pregnant in hindi

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how can i get pregnant in hindi

गर्भधारण की प्रक्रिया एक जटिल प्रक्रिया हैं , हालांकि कभी कभी  pregnant होना आसान होता हैं ,कई कपल्स को इसमें problems आती हैं इसका प्रमुख कारण हैं कमजोर या कम स्पर्म काउंट होने के कारण से इनको कंसीव करने में समस्या आती हैं 

How to get pregnant

इस संदर्भ में अनेक  research की गई हैं  जिनमे जो सार छिपा हुआ है वो निम्न हैं  हालाँकि इस संदर्भ में doctor से सलाह लेना अति आवश्यक हैं

1 . Pregnant होने के लिए पुरुष और महिला के मध्य में सेक्स होना आवश्यक हैं गर्भ धारण करने का सही समय मध्य चक्र होता हैं यानि की मासिक चक्र से 11 से लगभग 19 दिन का समय इस समय शुक्राणु २४ घंटे तक जीवित रहते हैं यही सही समय होता हैं

2 . Sex दौरान स्पर्म वजाइना से बहार नहीं आना चाहिए 

3 . इनके आलावा pregnant होने वाली महिला को हमेशा तनाव मुक्त रहना चाहिए जिससे  pregnant होने की संभावना बढती हैं 

4 . उम्र के लिहाज़ से देखा जाये तो औरत की उम्र ३५ साल तक गर्भधारण के लिए सही रूप से उपयुक्त रहती हैं

5 . एक अनुमान के अनुसार 15 परसेंट से अधिक दम्पतियों को गर्भधारण में समस्याएं आती हैं इसके लिए किसी भी प्रकार के नशे से बचना चाहिए जैसे की शराब , सिगरेट ,बीड़ी , गुटका ,जर्दा ,तम्बाकू सेवन और अन्य प्रकार के नशो से ,साथ ही अच्छा सेहतमंद खाना खाना चाहिए साथ ही खाना सही समय पर खाना चाहिये

6 . गर्भधारण न होने का एक कारण पुरषों में आवश्यकता से कम शुक्राणुओ का निर्माण होना भी हैं , यदि सेक्स के दौरान स्त्री ओर्गास्म ग्रहण कर लेती हैं तो गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती हैं महिलाओ को खाने में विटामिन सी देने वाला खाना खाना चाहिए  बादाम का सेवन भी महिलायों के लिए अच्छा रहता हैं हरी पत्तेदार सब्जिया भी महिलायों के प्रजनन अंगो को स्वथ रखने में सहायक होती हैं

 

उम्मीद करते हैं की आपको भी ये लेख पसंद आया होगा

 

 

 

pairon mein bandhan lyrics

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Pairon Mein Bandhan Hai Mohabbatein Lyrics

Pairon mein bandhan hai,
Payal ne machaya shor.
Pairon mein bandhan hai,
Payal ne machaya shor.
Sab darwaaze karlo band,
Sab darwaaze karlo band,
Dekho Aaye, aaye chor.
Pairon mein bandhan hai.
Tod de saare bandhan tu,
Tod de saare bandhan tu,
Machne de payal ka shor.
Tod de saare bandhan tu,
Machne de payal ka shor.
Dil ke sab darwaaze khol,
Dil ke sab darwaaze khol,
Dekho aaye, aaye chor.
Pairon mein bandhan hai.

Kahoon mein kya, karoon mein kya,
Sharam aajati hai.
Na yun tadpa ke meri jaan,
Nikalti jaati hai.
Tu aashiq hai, mera sacha,
Yakin to aane de.
Tere dil mein agar shaq hai,
To bas phir jaane de.
Itni jaldi laaj ka,
Ghunghat na kholoongi,
Sochoongi phir soch ke,
Kal parson bolungi.
Tu aaj bhi haan na boli,
Oye Kudiye teri doli,
Le na jaaye, Koi Aur
Pairon mein bandhan hai,
Pairon mein bandhan hai,
Payal ne machaya shor.
Sab darwaaze karlo band,
Sab darwaaze karlo band,
Dekho Aaye, aaye chor.
Tod de saare bandhan tu,
Hoye, Tod de saare bandhan tu,
Machne de payal ka shor.
Dil ke sab darwaaze khol,
Dil ke sab darwaaze khol,
Dekho aaye, aaye chor.
Pairon mein bandhan hai.

Jinhe milna, hai kuch bhi ho
Aji mil jaate hain,
Dilon ke phool,
To pathjhad mein bhi khil jaate hai.
Zamaana doston, dil ko,
Deewaana kehta hai.
Deewana dil, zamaane ko,
Deewana kehta hai.
Le mein saiyaan, aagayi
Saari duniya chod ke,
Tera bandhan baandh liye,
Saare bandhan tod ke.
Ek duje se jud jayen,
Aa hum dono ud jayen,
Jaise sang patang aur dor.

Pairon mein bandhan hai,
Pairon mein bandhan hai,
Payal ne machaya shor
Sab darwaaze karlo band,
Sab darwaaze karlo band,
Dekho Aaye, aaye chor.
Tod de saare bandhan tu,
Tod de saare bandhan tu,
Machne de payal ka shor
Dil ke sab darwaaze khol,
Dil ke sab darwaaze khol,
Dekho aaye, aaye chor.
Sab darwaaze karlo band,
Sab darwaaze karlo band,
Dekho Aaye, aaye chor.
Haan dekho aaye, aaye chor.
Dekho aaye, aaye chor.
Arre dekho aaye, aaye chor

pairon mein bandhan lyrics